Sunday, June 24, 2007

ससुर जी उवाच

डरते झिझकते
सहमते सकुचाते
हम अपने होने वाले
ससुर जी के पास आए,बहुत कुछ कहना चाहते थे
पर कुछ बोल ही नहीं पाए।

वे धीरज बँधाते हुए बोले-बोलो!
अरे, मुँह तो खोलो।
हमने कहा-जी. . . जी जी ऐसा है वे बोले-कैसा है?
हमने कहा-जी. . .जी ह़म
हम आपकी लड़की काहाथ माँगने आए हैं।

वे बोलेअच्छा!हाथ माँगने आए हैं!
मुझे उम्मीद नहीं थी
कि तू ऐसा कहेगा,
अरे मूरख!माँगना ही था तो पूरी लड़की माँगता
सिर्फ़ हाथ का क्या करेगा?

2 comments:

Anonymous said...

जी आपके ससुर जी ने सही फरमाया......सिर्फ हाथ नहीं माँगना चाहिए था, वरना खाली हाथ नहीं लौटाते

Eternal Rebel said...

ha ha ... to aakhir me hua kya ? aisa to nahi hua na - bhay me dono gaye , ladki mili na haath :P