मेरा जीवन कितना अपना
मेरा जीवन जैसे सपना
सपना जिसमे रंग नहीं है
कोई मेरे संग नहीं है
एक अकेली मेरी आँखे
एक अकेला मेरा सपना
ऐसा जिसमे मै ही मै हूँ
ऐसा जिसमे इन्तजार है
ऐसा जिसमे हार नहीं है
लेकिन इसमें प्यार नहीं है
काश ये सपना सच न होता
काश ये सपना सच न होता
काश मै ये सब नहीं देखता
लेकिन गर ये सब न होता
जो होता वो कब न होता
जो लिखता हूँ
जो करता हूँ
जैसा हूँ मै
अब ना होता !
No comments:
Post a Comment